Tantra

नूर-ए-तंत्र में यब-युम

admin 27 May 2022 1 min read 4,574

यब-युम नूर-ए-तंत्र की सबसे अहम और गहरी अमल है। इसमें मर्द और औरत की एनर्जी होश और इश्क़ के साथ एक होती है। यह सिर्फ़ जिस्मानी मिलाप नहीं, बल्कि नूर का लेन-देन और कुंडलिनी के बेदार होने का तरीक़ा है।

यब-युम का मफ़हूम नूर-ए-तंत्र में

यब का मतलब है मर्दाना तत्व (नूर का ज़ाहिर रूप)। युम का मतलब है ज़नाना तत्व (नूर की बातिनी क़ुव्वत)।

जब दोनों एक होते हैं तो सिर्फ़ दो जिस्म नहीं मिलते, बल्कि दो नूर एक हो जाते हैं। नूर-ए-तंत्र में इसे इलाही मिलाप कहा जाता है। यहाँ मक़सद भोग नहीं, बल्कि फ़ना और बेदारी है।

यब-युम की हालत

दोनों सालिक एक-दूसरे के क़रीब बैठते हैं। औरत मर्द की गोद में होती है। सीने से सीना सट जाता है। साँसें एक लय में चलने लगती हैं। नज़रें या तो बंद होती हैं या एक-दूसरे में डूब जाती हैं।

इस हालत में:

  • दिल में इश्क़ जागता है
  • रीढ़ में एनर्जी उठने लगती है
  • ज़िक्र दिल की धड़कन के साथ चलता है
  • अहंकार धीरे-धीरे गलने लगता है

अमल का तरीक़ा

  1. दोनों पाक-साफ़ होकर शांत जगह पर बैठें।
  2. मर्द सिदा क़ामत से बैठे। औरत उसकी गोद में सामने की तरफ़ आए।
  3. दोनों के क़ल्ब एक-दूसरे से सट जाएँ।
  4. साँस को मिलाएँ। दम लेते वक़्त एनर्जी को नीचे से ऊपर ले जाने का तसव्वुर करें।
  5. ज़बान पर या दिल में ज़िक्र जारी रखें — “हू” या “अल्लाह” या कोई और मंज़ूर शुदा ज़िक्र।
  6. अगर जिस्मानी जोश बढ़े तो हिले नहीं। सिर्फ़ होश बनाए रखें और एनर्जी को ऊपर की तरफ़ मोड़ें।
  7. जितनी देर शरीर और दिल दोनों राज़ी हों, उतनी देर इसी हालत में रहें।

यब-युम में क्या हासिल होता है?

  • कुंडलिनी का बेदार होना
  • चक्रों का साफ़ और गरम होना
  • इश्क़ का जिस्म और रूह दोनों में फैलना
  • फ़ना की शुरुआती हालत
  • दो अस्तित्व का एक नूर में बदल जाना

ज़रूरी उसूल

  • दोनों की पूरी रज़ामंदी और एहतराम होना ज़रूरी है।
  • मक़सद सिर्फ़ लज़्ज़त नहीं, बल्कि नूर और बेदारी होना चाहिए।
  • बिना होश के यह अमल भोग बन जाता है। होश के साथ यह साधना बन जाता है।
  • जल्दबाज़ी और ज़बरदस्ती से परहेज़ करें।

नतीजा

नूर-ए-तंत्र में यब-युम सिर्फ़ एक मुद्रा नहीं। यह इश्क़ और एनर्जी का सबसे क़रीबी मिलाप है।

जब दो दिल और दो जिस्म नूर की नीयत से एक होते हैं, तो कुंडलिनी ख़ुद बेदार होने लगती है। अहंकार गलता है। और सालिक को वहदत का तजर्बा होता है।

यही नूर-ए-तंत्र का यब-युम है — जिस्म से शुरू होकर नूर पर ख़त्म होने वाला मिलाप।

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