तंत्र में वशीकरण साधना

admin 26 Jul 2026 1 min read 10

तंत्र में “वशीकरण” शब्द का उल्लेख मिलता है। इसका शाब्दिक अर्थ है — किसी को वश में करना या आकर्षित करना। प्राचीन तांत्रिक ग्रंथों में इसे एक सिद्धी के रूप में वर्णित किया गया है। लेकिन आधुनिक समय में इसे अक्सर गलत समझा और गलत इस्तेमाल किया जाता है।

वशीकरण का पारंपरिक अर्थ

तंत्र की उच्च दृष्टि में वशीकरण का असली लक्ष्य किसी दूसरे व्यक्ति को नियंत्रण में लेना नहीं था। बल्कि:

  • अपने मन को वश में करना
  • इंद्रियों को वश में करना
  • और अंततः अपनी ही चंचलता पर विजय प्राप्त करना

होता था। जब साधक खुद पूरी तरह वश में हो जाता है, तब उसकी उपस्थिति और ऊर्जा स्वाभाविक रूप से दूसरों को प्रभावित करने लगती है। इसे बाहरी वशीकरण नहीं, बल्कि आंतरिक सिद्धी कहा जाता था।

आधुनिक समय में प्रचलित धारणा

आजकल वशीकरण के नाम पर कई उपाय बताए जाते हैं — मंत्र, यंत्र, झाड़-फूंक, वश में करने वाले प्रयोग आदि। अधिकांश लोग इन्हें प्रेम, रिश्ते या किसी को अपने काबू में करने के लिए अपनाते हैं।

यह दृष्टिकोण तंत्र के मूल सिद्धांत के विपरीत है। तंत्र स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी की स्वतंत्र इच्छा के विरुद्ध किया गया कोई भी प्रयोग अधर्म है और साधक के लिए उल्टा फलदायी होता है।

महत्वपूर्ण चेतावनी

  • किसी को जबरदस्ती आकर्षित करना या नियंत्रण में लेना नैतिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से गलत है।
  • ऐसे प्रयोग अक्सर भय, असुरक्षा और नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं।
  • कई तथाकथित “वशीकरण के उपाय” भ्रम, भय या धोखाधड़ी पर आधारित होते हैं।
  • तंत्र का मार्ग किसी पर शासन करने का नहीं, बल्कि स्वयं मुक्त होने का है।

तंत्र की वास्तविक दृष्टि

सच्चा तांत्रिक साधक वशीकरण की चाह नहीं रखता। वह अपने अंदर की शक्ति को जगाता है। जब कुंडलिनी जागृत होती है, चक्र सक्रिय होते हैं और चेतना स्थिर होती है, तब साधक की उपस्थिति में ही एक स्वाभाविक आकर्षण और प्रभाव उत्पन्न होता है। इसे कृत्रिम वशीकरण की जरूरत नहीं पड़ती।

निष्कर्ष

तंत्र में वशीकरण का उल्लेख तो है, लेकिन उसका उद्देश्य किसी को गुलाम बनाना नहीं, बल्कि खुद को पूर्ण रूप से जागृत और स्वतंत्र करना है।

यदि कोई साधक सच में तंत्र की शक्ति चाहता है, तो उसे बाहरी नियंत्रण की साधना छोड़कर आंतरिक शुद्धि, ध्यान, प्राणायाम और कुंडलिनी जागरण पर ध्यान देना चाहिए।

सच्ची शक्ति वही है जो किसी को वश में नहीं करती, बल्कि सबको मुक्त करती है।

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