Chakra & Energy

नाड़ी शोधन विधि

admin 09 Jul 2026 1 min read 1,146

नाड़ी शोधन योग और तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्राणायाम विधियों में से एक है। इसे अनुलोम-विलोम भी कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य इडा और पिंगला नाड़ियों को शुद्ध और संतुलित करना है, जिससे सुषुम्ना नाड़ी के सक्रिय होने का मार्ग तैयार हो।

नाड़ी शोधन क्यों करें?

  • इडा (चंद्र) और पिंगला (सूर्य) नाड़ियों का संतुलन बनाता है
  • मन को शांत और स्थिर करता है
  • शरीर में प्राण ऊर्जा का प्रवाह सुधरता है
  • ध्यान के लिए मजबूत आधार तैयार करता है
  • कुंडलिनी साधना के लिए नाड़ियों को शुद्ध करता है
  • तनाव, बेचैनी और मानसिक थकान कम करता है

तैयारी

  • खाली पेट या हल्के पेट अभ्यास करें
  • रीढ़ सीधी रखकर किसी शांत स्थान पर बैठें (पद्मासन, सिद्धासन या सुखासन)
  • कंधे शिथिल रखें
  • बायाँ हाथ घुटने पर ज्ञान मुद्रा में रखें
  • दाएँ हाथ की नासिका मुद्रा बनाएँ (अंगूठे से दाईं नासिका, अनामिका और मध्यमा से बाईं नासिका बंद करने के लिए)

नाड़ी शोधन की विधि (चरणबद्ध)

चरण 1: दाएँ हाथ के अंगूठे से दाईं नासिका बंद करें। बाईं नासिका से धीरे-धीरे और गहरी साँस लें।

चरण 2: अब बाईं नासिका को अनामिका और मध्यमा से बंद करें। अंगूठा हटाकर दाईं नासिका से धीरे-धीरे साँस छोड़ें।

चरण 3: दाईं नासिका से ही धीरे-धीरे साँस लें।

चरण 4: दाईं नासिका बंद करें और बाईं नासिका से साँस छोड़ें।

यह एक पूर्ण चक्र हुआ।

अभ्यास की संख्या और समय

  • शुरुआती साधक: 5 से 7 चक्र
  • नियमित साधक: 11 से 21 चक्र
  • उन्नत साधक: 27 या अधिक (क्षमता के अनुसार)

प्रत्येक साँस को आरामदायक, लंबी और सूक्ष्म रखें। जोर-जबरदस्ती न करें।

श्वास का अनुपात (उन्नत अभ्यास)

जब अभ्यास स्थिर हो जाए तो अनुपात अपना सकते हैं:

  • साँस लेना : 4 गिनती
  • साँस रोकना : 16 गिनती (आंतरिक कुंभक)
  • साँस छोड़ना : 8 गिनती

शुरुआत में केवल साँस लेने और छोड़ने पर ध्यान दें। कुंभक बाद में जोड़ें।

लाभ

  • मानसिक शांति और एकाग्रता बढ़ती है
  • शरीर में ऊर्जा का संतुलन बनता है
  • नींद की गुणवत्ता सुधरती है
  • भावनात्मक स्थिरता आती है
  • ध्यान में गहराई बढ़ती है
  • इडा-पिंगला के संतुलन से सुषुम्ना सक्रिय होने लगती है

सावधानियाँ

  • जोर से या तेज साँस न लें
  • अगर चक्कर आए, बेचैनी हो या सिर में दबाव बने तो तुरंत रोक दें
  • सर्दी-जुकाम या नासिका बंद होने पर अभ्यास न करें
  • उच्च रक्तचाप या हृदय रोग हो तो कुंभक न करें
  • गर्भावस्था में केवल सरल अनुलोम-विलोम करें, कुंभक से बचें
  • अभ्यास के बाद कुछ मिनट आँखें बंद करके शांत बैठें

निष्कर्ष

नाड़ी शोधन कोई साधारण श्वास अभ्यास नहीं है। यह सूक्ष्म शरीर की सफाई और संतुलन की साधना है।

नियमित और सही विधि से करने पर यह मन को शांत करता है, ऊर्जा को संतुलित करता है और गहरी साधना का मार्ग खोलता है।

धैर्य रखें। जल्दबाजी न करें। और हर साँस को जागरूकता के साथ लें।

यही नाड़ी शोधन की असली विधि है।

Comments (0)

Login to leave a comment.

No comments yet. Be the first.

Related Articles